हे प्रभो वर दीजिए धारण करें सन्तोष हम।

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प्रार्थना – हे प्रभो वर दीजिए धारण करें सन्तोष हम।

(तर्ज-यज्ञरूप प्रभो हमारे भाव उज्वल कीजिए)

हे प्रभो वर दीजिए धारण करें सन्तोष हम।
दूसरों के गुण निहारें और अपने दोष हम।
हे प्रभो वर दीजिए…………

१. सत्य शुद्धाचार सद्व्यवहार के होवें धनी
शुभ गुणों से कर सकें भरपूर अपना कोष हम।
हे प्रभो वर दीजिए…………

२. हों सदा निःस्वार्थ मन अभिमान कोसों दूर हो
मन वचन और कर्म से होवें सभी निर्दोष हम।
हे प्रभो वर दीजिए…………

३. देश जाति धर्म रक्षा के सदा प्रहरी बनें
और सजग होकर रहें न हों कभी मदहोश हम।
हे प्रभो वर दीजिए…………

४. काँप जाएँ वेद निन्दक नास्तिकों की टोलियाँ
ऊँचे स्वर से बोलें वैदिक धर्म का जय घोष हम ।
हे प्रभो वर दीजिए…….

५. दुर्गुणों को छोड़ देवें ‘पथिक’ मन को जीत लें
इन्द्रियों के दमन में पूरा दिखावें जोश हम ।
हे प्रभो वर दीजिए…………