तू कर बंदगी और भजन धीरे-धीरे।
तू कर बंदगी और
भजन धीरे-धीरे।
मिलेगी प्रभु की
शरण धीरे-धीरे ।।१।।
दमन इन्द्रियों का तू
करता चला जा। फिर
काबू में आयेगा
मन धीरे-धीरे ।। २ ।।
सुनें कान तेरे सदा
वेद वाणी। तू कर
वेद वाणी का मनन
धीरे-धीरे।।३।।
सफर अपना आसान
करता चला जा।
छूटेगा यह आवागमन धीरे-धीरे ।।४।।
तू दुनियां में शुभ काम
करता चला जा। तू कर
शुद्ध अपना चलन धीरे-धीरे।।५।।










