बन्दे मन के गन्दे,चले निष्फल सांस तुम्हारे ।
बन्दे मन के गन्दे,
चले निष्फल सांस तुम्हारे ।
दिन तो बीते धन की धुन में,
नींद में रात गुजारे ।।
नैन नशे में चूर रहे,
पग सत्संग से दूर रहे।
हाथ करे न दान कभी,
कान सुने नहीं ज्ञान कभी।
धर्म कर्म व्यवहार नहीं,
मात पिता से प्यार नहीं।
जिह्वा मधुर वचन नहीं बोले,
कड़वे वचन उचारे।।
बन्दे…….
धन दौलत जो पास तेरे है,
नौकर चाकर दास तेरे।
बहुत है कारोबार तेरा,
इतना बड़ा परिवार तेरा।
बिल्डिंग और मकान सभी,
बाग बगीचे शान सभी।
इक दिन छोड़ के सब जाना है,
दोनों हाथ पसारे।।
बन्दे…
जिसने तुझे है जन्म दिया,
उसको न कभी तूने याद किया।
विषयों में इतना फूल गया,
परमपिता को भूल गया।
उसके बिना कोई ठौर नहीं,
पथिक सहारा और नहीं।
परमेश्वर की शरण में आजा,
तज के सभी सहारे।।
बन्दे…










