सदा सदा के साथी मेरे तेरी जय जयकार करूँ

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सदा सदा के साथी मेरे तेरी जय जयकार करूँ

सदा सदा के साथी मेरे
तेरी जय जयकार करूँ
हर पल सिमरू नाम तुम्हारा
तेरा ही गुणगान करूँ

तप संयम का जीवन राखूँ
क्षमा का शृंगार करूँ
तेरी जय जयकार करूँ मैं
भव सागर से पार तरू

अन्तर्यामी नाथ तुम
जीवन के आधार
जो तुम छोड़ो बाँह तो
कौन लगाए पार

जिस तरह अग्नि का शोला
संग में मौजूद है
उसी तरह परमात्मा
हर रंग में मौजूद है तो
हम आये शरण तुम्हारी
हम आये शरण तुम्हारी
प्रभु ! आये शरण तुम्हारी

हर कुटिया में अमृत भर दो
रोम रोम सब पुलकित कर दो
तेरे बनें पुजारी
हम आये शरण तुम्हारी
प्रभु ! आये शरण तुम्हारी
हम आये शरण तुम्हारी

मीठे मीठे वचन सुनायें
फूल बनें सबको महकायें
होकर हम हितकारी
हम आये शरण तुम्हारी
प्रभु ! आये शरण तुम्हारी
हम आये शरण तुम्हारी

बुरे भले है तेरे भगवन्
“आशानन्द” हैं तेरे अर्पण
भिक्षा डाल भण्डारी
हम आये शरण तुम्हारी
प्रभु ! आये शरण तुम्हारी
हम आये शरण तुम्हारी