हे राजन बता दो, ये क्या हो गया।

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तर्ज – नमन उन शहीदों को..

(श्रवण के माता-पिता श्रवण की मृत्यु के बाद राजा दशरथ से रोते हुये कहते हैं-)

हे राजन बता दो, ये क्या हो गया।
हमारा वो श्रवण, कहाँ खो गया।

बेटे का गम हम कैसे सहेंगे
श्रवण बिना हम कैसे रहेंगे
तड़फेगा तू भी अरे एक दिन
रहना पड़ेगा रे औलाद बिन
लिखते “सचिन” गीत को रो गया
हमारा वो श्रवण,
कहाँ खो गया हे राजन……

ना घर बार उसने उजाड़ा था
तेरा ना ही काम कोई बिगाड़ा था
तेरा श्रवण आँखों का तारा था
वो बुढ़ापे का एक ही सहारा था
वो क्यूँ मौत की गोद में सो गया
हमारा वो श्रवण,
कहाँ खो गया हे राजन……

ना सोचा ना समझा
ना कुछ विचारा निर्दोष
तूनें मेरा लाल मारा चलाया
मेरे लाल पे तीर तूने उसकी
अरे छाती दी चीर तूने टुकड़ा
जिगर का चला वो गया
हमारा वो श्रवण,
कहाँ खो गया हे राजन……