प्रभु तूने जहान रचाया

0
15

प्रभु तूने जहान रचाया

तर्ज – मेरा दिल ये पुकारे…….

प्रभु तूने जहान रचाया,
कण-कण में तू है समाया।
तेरी महिमा अपार,
तेरा पाया नहीं पार प्रभु
तूने जहान रचाया।

बाग में मोर नगुमा,
तेरा भज रहा-भज रहा
कैसा रंगीन तन वो,
“सचिन” सज रहा सज-रहा
तू है दीनों की दयाल,
तुझे सबका ही ख़्याल
ये सोच के मैं चकराया,
तेरी महिमा अपार……

खूब नग्मे मधुर,
ये पवन गा रही-गा रही
हर सुमन से सुगन्धी,
तेरी आ रही आ रही
कैसी तेरी प्रभुतायी,
तेरी जानी ना खुदायी
बेमिसाल तुझे ही बताया,
तेरी महिमा अपार…….

चाँद सूरज सितारे,
तेरा रूप है-रूप है कहीं छाया है तेरी,
कहीं धूप है-धूप है तू है सर्वशक्तिमान,
तेरी रचना महान जग बाग ये तूने लगाया,
तेरी महिमा अपार……..