संसार रचाया, कभी कोई जान ना पाया

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संसार रचाया, कभी कोई जान ना पाया

तर्ज – गोरी हैं कलाइयाँ…..

संसार रचाया, कभी
कोई जान ना पाया
कैसा
निराला भगवान है, संसार……

  1. ऊपर निगाहें डालो,
    कितने सितारे हैं शब में
    ये चर्ख में, लगते ये प्यारे हैं
    है धूप कहीं छाया,
    कभी कोई…….

भानु शशि से देखो,
जग जगमगाया है कैसा
निराला उसने, जहाँ ये रचाया है
नदियों को बहाया, कभी कोई……

कैसे गुलों के अन्दर,
खुशबू भरी है उसके समान
रचना, किसी की नहीं है
कलियों को खिलाया,
कभी कोई……

“सचिन” किसी को उसका,
कोई भेद पाया ना आके
किसी ने उसका, पता भी
बताया ना सृष्टि को रचाया,
कभी कोई……