तूने ओ विधाता,कैसा जादू किया सारा ये जहान
तर्ज – तूने ओ रंगीले……
तूने ओ विधाता,
कैसा जादू किया सारा ये जहान,
कैसे रच दिया कौन सा मसाला,
इस्तेमाल किया जो रच दिया, हो हो ऽऽऽ
- रंग बिरंगे फूल और कलियाँ,
किस भाँति है सजायी
गुलों के अन्दर कहाँ से भगवन,
इतनी खुश्बू आयी
हे जगदीश कमाल किया,
जो रच दिया,
हो हो ऽऽऽ तूने ओ विधाता……
2: जल के धारे सागर खारे,
और झरनों की लहरें
नीले-नीले शान्त समन्दर,
नदियाँ और ये नहरें
कैसे सभी का ख़्याल किया,
जो रच दिया,
हो हो ऽऽऽ तूने ओ विधाता……
महन्त यति साधु व ऋषि,
ना जान ये कोई पाया
इतना सुन्दर जहाँ ‘सचिन’ ये,
कैसे तूने रचाया ये ही
सबने सवाल किया,
जो रच दिया,
हो हो ऽऽऽ तूने ओ विधाता…..










