छोड़कर सब काम, प्रभु का ध्यान कर।
तर्ज – रेशमी सलवार कुर्ता जाली का……
छोड़कर सब काम, प्रभु का ध्यान कर।
बात मेरी ये मान, ये कर्म महान कर ।।
कर याद उसे तू नादाँ,
ये जिसने जहान रचाया
वो मालिक ‘सचिन’ सभी का,
ना समझ में तेरी आय ना
तू अभिमान कर,
बात मेरी ये मान,
ये कर्म महान का छोड़कर सब काम……..
निश के आँगन में जिसने,
तारों का जाल बिछाया है
चाँद उसी से रोशन,
ना जान तू इतना पाया रे
कुछ तो रूझान कर,
बात मेरी ये मान,
ये कर्म महान का छोड़कर सब काम……
झरने ये झर-झर झरते,
उसकी ही महिमा गाते
आँधी तूफान सभी ये,
उसका ही गान सुनाते रे
सीना तान कर, बात मेरी ये मान,
ये कर्म महान कर छोड़कर सब काम……










