आया हूँ शरण सच्चिदानन्द की

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आया हूँ शरण सच्चिदानन्द की

ओ३म् नाम बसा है मेरे चिन्तन में ॥

निन्दा में न व्यर्थ उलझना है।

मद द्वेष को मन से तजना है

कभी आए ना मौके अनबन के….॥ ओ३म् नाम…

खोजूँ ना किसी में दोष कभी

खुद अपने ही दोष मिटाऊँ सभी

बंध जाऊँ न स्वार्थ न बन्धन में…॥ ओ३म् नाम….

नहीं लोभ में मन को लगाना है

परधन को धूल ही माना है

जिस विध राखे रहूँ उस रंग में…| ओ३म् नाम…

मेरे मन को मुझे समझाना है

दुर्गुण के पास ना जाना है

मैं जानूँ मिले प्रभु शुद्ध मन में…| ओ३म् नाम…

प्रभु बैठा मन के मन्दिर में

कहाँ ढूँढ़े नदियाँ समन्दर में

छबि आती नज़र अन्तर्मन में… ॥ ओ३म् नाम….

निष्काम जीवन पर चलना कठिन

पर चाहो तो नहीं क्या मुमकिन

मिले अमृत, ज्ञान के मंथन से… ॥ ओ३म् नाम…

मन ज्ञान की ओर लगाना है।

जो प्रकाश न पाया पाना है

मन जा बैठाकर सन्तन में… | ओ३म् नाम….

(परधन) पराया धन (मुम्किन) सम्भव हो ।

तर्ज: पायल मेरी तू है छम छम के