ना बहन किसी की है कोई

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ना बहन किसी की है कोई

तर्ज – दिल लूटने वाले जादूगर…….

ना बहन किसी की है कोई,
ना किसी का कोई भाई है।
हैं बनी-बनी के मीत सभी,
ये कड़वी एक सच्चाई है।

है चाल ज़माने की न्यारी,
ना ‘सचिन’ समझ में आयेगी
विपदा जब सर पे आयेंगी,
गमगीन घटायें छायेंगी
सब दूर-दूर को भागेंगे,
हमने दुनिया आजमायी है
हैं बनी-बनी के……….

जब बात बिगड़ जाती है कोई,
भाई भी आँख चुराता है
ताऊ ताई चाचा चाची,
कोई ना साथ निभाता है
ना करते बात पिताजी भी,
ना गले लगाती मायी है
हैं बनी-बनी के……..

अपने भी पराये हो जाते,
ना आस पास कोई पाता है
जो बने थे रिश्तेदार कभी,
कोई ना मिलने आता है
ताने देती घरवाली भी,
जो फेरे लेकर आयी है
हैं बनी-बनी के……….

कर लेते मेल पड़ोसी भी,
जब समय सुहाना आ जाता
सब हाल पूछने लगते हैं,
और खूब निभाते हैं नाता
खुश हो जाती है बीवी भी,
जो कभी भी ना मुस्कायी है
हैं बनी-बनी के………..