अन्धकार में है जीवन,हे ईश दया कर दो।
तर्ज – होठों से छू लो तुम…….
अन्धकार में है जीवन,
हे ईश दया कर दो।
हृदय में हमारे भी,
उत्साह उमंग भर दो।
अन्धकार में है……
- संसार की उलझन में,
ना उलझ कहीं जायें
भक्ति से तेरी भगवन,
मंज़िल अपनी पायें
मुक्ति का यतन कर लें,
भक्ति रूपी ज़र दो
अन्धकार में है….. - खुश्बू से तेरी महके,
जीवन रूपी बगिया भूलें
ना कभी तुझको,
जीवन में हों खुशियाँ
वाणीं से मधुर बोलें,
ऐसा हमको स्वर दो
अन्धकार में है……… - जीवन की राहों में,
विचलित ना हो जायें
वेदों की ओर बढ़े,
वैदिक पथ अपनायें
दर-दर ना कभी भटकें,
हमको ऐसा वर दो
अन्धकार में है…… - विनती करता है “सचिन”,
उपकार का हो जीवन मद
लोभ अहम् ना हो,
उज्जवल हो सबका
मन सत्कार अतिथि का,
करने वाला दर दो
अन्धकार में है………










