ओ दुनिया वालो, यह देश हमारा

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ओ दुनिया वालो, यह देश हमारा (धुन-फिरकी वाली तू कल फिर)

ओ दुनिया वालो, यह देश हमारा,
कभी नहीं, हारा लड़ाई के मैदान में।
इसकी वीरता की धाक है जहान में।। टेक ।।

पहले किसी को कभी छेड़ा नहीं है,
छेड़ा है जिसने उसको ना छोड़ा
पीठ दिखा कर जो भागा युद्ध से
उसके पीछे कभी ना दौड़ा।।

भोले भाले, हिम्मत वाले,
हैं इसके रखवाले।
सब निवासी कमी ना जरा
सी भी आने देंगे शान में।
देश भक्ति भरी हर एक
नौजवान में ।।1।।

विजय पताका फहराता सिकन्दर,
जब भारत में आया था।
एक छोटे से राजा पौरूष से
लड़कर वह इतना घबराया था ।।

यूनानी कलन्दर, भारत अन्दर से
बन करके बन्दर, वापिस दौड़ा,
और रिश्ता जोड़ा दई
भूमि कन्यादान में।।
शादी हुई चन्द्रगुप्त की यूनान में।।2।।

दे रहा हे इतिहास गवाही आये
अनेकों यहां हमलावर ।
जिन्दा न लौटा कोई वापिस
यहां से सबकी यहीं पर बनी कबर ।
नादिर व हालकू चंगेज डाकू
लड़कर हमसे लाखों ।।

मां कूं रो गये, हमेशा को सो गये
वह पड़कर कब्रिस्तान में।
जिनके पाजामे सुखें थे
आसमान में।।3।।

चीनी अफीमची पाकिस्तानी
जुलाहे कल परसों आकर के लड़े।
दही के बदले में कपास को
निगलकर वह बेचारे मारे पड़ें।

हम सब भाई, करें लड़ाई,
जब कोई दुश्मन आतताई आवे,
मिटाना हमें चाहवे, हम ‘प्रेमी’
उस दौरान में।।
एक हो जाते हैं देश के उत्थान में ।।4।।