विश्व विजयी मनु का प्यारा

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विश्व विजयी मनु का प्यारा

विश्व विजयी मनु का प्यारा
डंडा ऊँचा रहें हमारा। टेक।
धर्म कर्म ऋषियों की वाणी
से जिसको हो गई ग्लानी।
वह दस्तु पामर अज्ञानी डंडे
ही ने सदा सुधारा ।।1।।

इस डंडे के नीचे निश्चय
रहते हैं सब प्राणी निर्भय।
मिलकर बोलों डंडे की जय
डंडा पाप विनाशन हारा।।2।।

डंडे का कानुन निराला मान
रहा हर अदना आला।
जिसका पडे डंडे से पाला
पानी ना मांगे दोबारा ।।3।।

जलचर थलचर नभचर सारे
नियन्त्रण में डंडे के मारे ।
डंडे को अपनाले प्यारे ‘प्रेमी’
क्यों फिरें मारा मारा।।4।।

चल पड़ा जो चीर कर अंधेर है,
राह में जो ना रूका वह शेर है,
जब तलक जलता रहा अंगार है,
बुझ गया तो राख का एक ढेर है,