यह देश मांगता है

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यह देश मांगता है (धुन- एक चीज मांगते हैं)

यह देश मांगता है
कुछ तेरे से जवान,
ऐसी वेसी चीज नहीं हैं,
मांगे बिल्कुल सभी सही है
किंचित भी इन्कार न
करना हो जायेगा अपमान। टेक।

रो रहे शोषित हो रहा शोषण
मांगे एक सा पालन पोषण ।
चिकित्सा न्याय शिक्षा का
स्तर होना चाहिये सबका बराबर।।
पेट को रोटी तन को वस्त्र
और रहने को मकान | |1 ||

घृणा द्वेष और जाति पाति
अब इस देश को नहीं सुहाती।
नफरत की दीवार हटा दे
सबको मानवता सिखलादे ।।
एक देश भाषा एक बोली
एक खान पहरान।।2।।

कर्तव्य पालन ईश्वर भक्ति
जन-जन अन्दर भर दो शक्ति।
जीवन पथ पर त्याग भाव से
लक्ष्य पै पहुँचों उमंग चाव से ।।
बाहर और भीतर के रिपुओं
की करके पहचान।।3।।

वैदिक सभ्यता और संस्कृति
से हो दुखों की निवृत्ति।
इसके सिवाय समस्या का
हल नहीं दूसरा कोई आजकल ।।
शोभाराम ‘प्रेमी’ करो
लागु स्वाम्भव मनु का विधान ।।4।।