देष मिटाकर हर व्यक्ति के दिल में प्यार बसाना है।
देष मिटाकर हर व्यक्ति के
दिल में प्यार बसाना है।
दुखों की दुनिया को खोकर
सुख का संसार बसाना है।।
ऊंच नीच का भेद मिटेगा
रानी ना महाराज रहे।
निर्दयी धनी नहीं रहना ना
मेहनतकश मौहताज रहे।।
मजलूमों मासूमों की नहीं
दर्द भरी आवाज रहे।
जात पात का छुआछात का
काम नहीं नाजायज रहे ।।
प्रेम का स्रोत बहे जिसमें
ऐसा परिवार बसाना है।।1।।
हर व्यक्ति को ध्यान रहे
नित्यप्रति दिनचर्या निभाने का।
सन्ध्या हवन किये बिन कोई
नाम न लेवे खाने का।।
आहार व्यवहार हो शुद्धबुद्धि में
खलल कभी ना आने का।
वैदिक शिक्षा प्रणाली ही
बदले ढंग जमाने का।।
ग्रामों और शहरों को हमें
मनु के अनुसार बसाना है।।2।।
वर्ण व्यवस्था ठीक चले
आश्रमों में बटकर जिन्दगानी।
अनुशासन के पालक हों
सब कोई करे नहीं मन मानी ।।
छत्री हो बलवान वैश्य हों
धनी ब्राह्मण ब्रह्मज्ञानी।
शूद्र करे सबकी सेवा
फिर नहीं राष्ट्र की हो हानि ।।
भ्रातृभाव आपस में सबके
भीतर बाहर बसाना है।।3।।
सस्कारों त्यौहारों पर वैदिक
रीति अपनाई जा।।
चौबीस साल के वर से
कन्या 18 साल की ब्याही जा।
गुण और कर्म स्वाभाव मिलें
फिर पति पत्नि की लड़ाई जा।।4।।
शोभाराम घर स्वर्ग बने
भारत से भाग बुराई जा।।
हृदय में निर्लेप नियन्ता
निर्विकार बसाना है।।
यम पालन का लाभ
दृढता से जब मनुष्य
अहिंसा वरण करे
वैर भाव के दूषण सारे
क्षरण करे उसके संगी
साथी जितने मानव हैं
उससे प्रेरित हो उसका
अनुसरण करें सत्य मानता
और बोलता दृढ़ता से
और उसी अनुरूप सदा
आचरण करें यथा अपेक्षित इच्छायें
जन उपकारी हो जाती है पूरी,
सकल दुख हरण करें










