प्रजा सोये खुले किवाड़
प्रजा सोये खुले किवाड़,
किसी का होता नहीं बिगाड़।
यहाँ प्रचार धर्म का हैं। टेक।
शुद्ध सात्विक अन्न और फल,
रोग निवारक वायु जल,
यहाँ प्रसार धर्म का है।।1।।
मर्यादित है चारों वर्ण,
अनुशासित हैं शुद्धाचरण,
यहाँ प्रसार धर्म का हैं।।2।।
पुरूष नहीं कोई व्यभिचारी,
ना कोई चरित्रहीन नारी,
यहाँ प्रसार धर्म का हैं।। 3।।
चिकित्सालय और बन्दीघर,
खाली पड़े हुये मुनिवर,
यहाँ प्रसार धर्म का हैं।।4।।
गौ माता घी दूध की
खान बछड़े कूदें मृग
समान यहा प्रसार धर्म का है।।5।।










