चुप हम से अब रहा न जाये
चुप हम से अब रहा न जाये,
कहते हुये लगे है डर भी।
गैरों जैसा घर लगता है,
आज हमें यह अपना घर भी।। टेक ।।
दर दीवार फर्श और
तोड़ रहे बेदर्द छत को, लुटेरे ।
नाम निशान हमारा एक दिन,
भूल जायेगें ये खण्डहर भी ।।1।।
देश के साथ में घात करे वो,
फिर भी पुरस्कार पाते हैं।
हमको बदनामी मिलती है,
देश धर्म ऊपर मर कर भी।।2।।
उनके स्वागत तो हैं देश
बहुत से और सत्कार करेगें।
शायद नट जायेगा हमें
जगह देने से, महासागर भी ।।|3||
सत्यमेव पर जयते नानृतम,
विश्वास हो प्रेमी। कैसे……..
अब तो ऐसा लगने भूल गया
हमको ईश्वर लगा है, भी।।4।।










