इस घर को ना जलाओं
इस घर को ना जलाओं
यह दुनिया क्या कहेगी।
तुम्हें ना समझ कहेगी
या बेवफा कहेगी।
गलती पै गलती करते,
समय बहुत हो चुका हैं।
आदत से बाज आओं,
तुम्हें दुनिया क्या कहेगी ।।1।।
तुम खेल खेलो बेशक ओरों
की जान लेकर।
रंगरैली ना मनाओं,
यह दुनिया क्या कहेगी।।2।।
कुकृत्यों के तुम्हारे चेहरों
पे दाग देखों।
यह कालिमा मिटाओं,
तुम्हे दुनिया क्या कहेगी।।3।।
बस बहुत हो चुकी है
अब प्रेमी रहम कर दो।
हम पर ए रहनुमाओं,
यह दुनिया क्या कहेगी।।4।।










