नई बात ना मैं कोई तुमको सुना रहा हूँ।

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नई बात ना मैं कोई तुमको सुना रहा हूँ।

नई बात ना मैं कोई
तुमको सुना रहा हूँ।
भूलों का जो पड़ा है,
पर्दा हटा रहा हूँ।।

ब्रह्मा से जैमिनी तक
ऋषि जिस पर चलते आये,
वह मार्ग सत्य सनातन
वैदिक दिखा रहा हूँ।।1।।

तर्को व युक्तियों से हस्ता
मलक वत होवे।
उस सत्य ज्ञान गुण का
ग्राही बना रहा हूँ।।12।।

एक ईश्वर नियम के और
दूजा सृष्टि कम के ।
प्रतिकूल हो जो मिथ्या जानो
जना रहा हूँ।।3।।

धार्मिक विचार पर तुम
प्रेमी क्यों लड़ रहे हो।
में मन मुटाव दिल से
वेमनस्य मिटा रहा हूँ।।4।।

प्राणायाम

बाहर से आता पवन-भीतर है वह श्वास
अन्दर से जाता बाहर-तव होता प्रश्वास
दोनों का आवा गमन लो विचार से थाम
मात्र ज्ञान से रोकना ही है प्राणायाम