जीवन का उद्देश्य बता गये (धुन : आई सुहाग की रात)
जीवन का उद्देश्य बता गये
ऋषिवर हमें विशेष,
यह तांता टूट न जाये,
यह बन्धन छूट न जाये।
प्रथम स्वयं निज की तैयारी,
आस्तिक बनो, रहो ब्रह्मचारी।
शारीरिक और आत्मिक उन्नति,
के लिये सीखों विद्या सारी।
गृहस्थ में फिर प्रवेश, बता गये ऋषिवर ।।1।।
सद्गृहस्थी बनो स्वार्थ से छुटकर,
परोपकार परिश्रम में जुटकर,
सारे नगर की करो भलाई,
निज जीवन से ऊपर उठकर ।
यह नित्य कर्म हमेश, बता गये ऋषिवर ।।2।।
वानप्रस्थ की लेकर दीक्षा निज
जीवन की करो परीक्षा।
सारे देश की करो धर्म निष्ठ दो
उत्तम भलाई, शिक्षा।
काटो सकल क्लेश,
बता गये ऋषिवर ।।३।।
मोक्ष द्वार आश्रम सन्यास है,
जीवन का अन्तिम इतिहास है,
शोभाराम यज्ञमय जीवन,
इसमे पास तो सब में पास है।
रक्षक हो भुवनेश,
बता गये ऋषिवर हमें विशेष ।
यह तांता टूट ना जाये
यह बन्धन छूट न जाये। 14 ।।
देश धर्म और और जाति का
गर चाहे उत्थान निज तन मन
की प्रगति शुरु करो अभियान शुरु करो
अभियान राष्ट्र उन्नति में रत हो
स्वार्थ त्याग उपकार यज्ञ का
पावन व्रत लो श्रम निष्ठा तप
त्याग कर चहुँ दिशि हो
परिवेश धर्म संस्कृति धान्य धन,
से सर साये देश










