एक दूसरे को धोखा देने की होड़ में
एक दूसरे को धोखा
देने की होड़ में,
लगे हुये नर-नार
आज बेढंगी दौड़ में।
तन मन वचन आचरण में
जन-जन के गिरावट होगी,
अन्दर कुछ और बाहर
कुछ बेतुकी दिखावट होगी,
कैसी बनावट होगी,
सड़े जा रहे मरोड़ में ।।1।।
जहाँ डंडे का डर नहीं था
वहाँ धर्म का डर होता था,
धर्म के विरूद्ध आचरण से
बुरे कर्म का डर होता था,
शर्म का डर होता था
पग-पग पर हर ठौड़ में ।।2।।
धर्म निर्पेक्ष राज्य भारत में,
खड़े पलड़े तुलरी,
देश द्रोहियों का सम्मान,
स्वागत में जय बुलरी,
सबकी पोल खुलरी
आज इस तोड़ फोड़ में ।।3।।
अन्धेर नगरी चौपट
राजा दिशा हीन जनता,
जान माल का खतरा
प्रेमी मन मलीन जनता,
तेरह तीन जनता हुई
खतरे के मोड़ में ।।4।।










