अधर्म तीन शरीर से सदा बचाव करो।।
अदत्तानामुपादानम् हिंसा चैवाविधानतः
परदारोपसेवा च शारीरम् त्रिविधम् स्मृतम (मनु)
अधर्म तीन शरीर से
सदा बचाव करो।। टेक ।।
अदत्तानामुपादानम् अर्थात्
चोरी करना।
युक्ति और तदवीर से
सदा बचाव करो ।। 1 ।
हिंसा अर्थात सब प्रकार
के कूर कर्म तजकर,
भेड़िये की तासीर से
सदा बचाव करो ।। 2।।
परदारोपसेवा अर्थात्
व्यभिचार कुकर्म,
काटों की जंजीर से
सदा बचाव करो ।। 3 ।।
तीन शारीरिक तीन
मानसिक चार वाचक अधर्म,
प्रेमी दस तकसीर से
सदा बचाव करो ।। 4।।










