नर तन को पा करके

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नर तन को पा करके

नर तन को पा करके,
यूं ही न गंवाना।
अनमोल जीवन,
मुश्किल है पाना।।

विषय वासनाओं के अनगिन लुटेरे,,
बैठे हुए हैं मार्ग में तेरे।
ठगियों से जीवन की गठरी बचाना ।।1।।

निद्रा व आहार मैथुन और भय,
पशुओं में भी तुझसा ही है।
पशुओं की भांति न जीवन बिताना ।। 2 ।।

प्रकृति में सुख नहीं है,
प्रभु की शरण में दुःख नहीं है।
प्रभु को भुलाकर धोखा न खाना ।। 3।।

काम क्रोध मद लोभ मोह पर
शोभाराम तू विजय प्राप्त कर।
शुभ कर्मों में मन को लगाना ।। 4।।