आर्य समाज भजनसभी लेख आत्म कृषक है सबल By Arya Samaj - April 29, 2025 0 19 FacebookTwitterPinterestWhatsApp आत्म कृषक है सबल आत्म कृषक है सबल,यम-नियमों का है हल।इन्द्रियां वृषभ हैं सुशक्त,मन है भूमि उजल ।। १ ।। प्राण-अपान है ओष समीर,ब्रह्म गुण हैं सुबादल।सद्गुण हरित सस्य श्यामल,आनन्द लहलहाती फसल ।। २ ।। Curent posts: सागर उमड़े,लहरें गीत सुनायें ये दुनिया बनाना और बना के फिर चलाना ध्यान में आए, हृदय में समाए ओ३म् है अमृत का इक सागर धर्म-मार्ग पे चलना नहीं है आसान इस सुन्दर जीवन की कालिका वन्दना की तेरा स्तोता बनके प्रभुजी ! सौ साल से भी ज्यादा तेरी हो जिंदगानी। कभी कोई आये यहाँ दुख न किसी को दिया करो