ओऽमु जाप है लांसानी

0
8

ओऽमु जाप है लांसानी

ओऽमु जाप है लांसानी,
अनहद नाद है रुहानी।
ब्रह्म जीव से जुड़ा है,
फिर भी जीव करे नादानी ।। टेक ।।

जनम-मरण मरण-जनम,
क्रम कितना अद्भुत है
समझा जिसने तर गया,
वो ना समझा डूबत है।
वेद ज्ञान है महानी,
जिसे जिए आत्मज्ञानी ।। १।।

ऋतधारी को सुख हैं सारे,
सुख सारे जीवन के।
संयमी तपस्वी मनस्वी सारे,
समृद्ध हैं तन-मन के।
दिव्यानुभूति आसमानी,
भापा बताए इस जबानी ।। २ ।।