ब्रह्म में सिमटकर यहां भी रह सकेगा।
ब्रह्म में सिमटकर यहां भी रह सकेगा।
यहां भी रह सकेगा वहां भी रह सकेगा।। टेक ।।
ज्ञान साथ तेरे ब्रह्म साथ रहेगा।
तू सदा ही उसके पास-पास रहेगा।
जीवन में सदा तू उपनिषद जीएगा ।। १।1
जीवन तेरा ये ब्रह्मपद उठेगा।
हर क्षण इसमें आनन्द ही झरेगा।
थमन योग चढ़कर ये ब्रह्म में थमेगा ।।२।।
नर के सच में नारायण बसेगा।
तन के गहन में अब ब्रह्म सजेगा।
अब ही अब जीएगा समय सिद्ध सधेगा ।। ३ ।।










