ब्रह्म से बिछडकर कहां रह सकेगा।
ब्रह्म से बिछडकर
कहां रह सकेगा।
यहां रह सकेगा,
न वहां रह सकेगा ।। टेक ।।
सदा साथ है तेरे
सदा साथ रहेगा।
तू कब तक सच से
यूं अनजान रहेगा।
अज्ञान अपना न क्या
कम करेगा ।। १ ।।
हर तेरे कर्म का
साक्षी वो एक है।
तेरा उसका सम्बन्ध
निकटतम का द्वैत है।
द्वैत से एक तक सफर
तय करेगा ।। २।।
सदा साथ है तेरे सदा
साथ रहेगा।
तू कब तक सच से
यूं अनजान रहेगा।
अज्ञान अपना न क्या
कम करेगा ।। १ ।।
हर तेरे कर्म का साक्षी
वो एक है।
तेरा उसका सम्बन्ध
निकटतम का द्वैत है।
द्वैत से एक तक सफर
तय करेगा ।। २।।










