छल कपट मिटाना है जग

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छल कपट मिटाना है जग

छल कपट मिटाना है जग

छल कपट मिटाना है जग
से प्रभु हिम्मत दो हमको ।।
जो ठानें हम अपने मन में
उसे पूरा कर दिखलाएँ।
जग से भ्रष्टाचार मिटाएँ
सक्षम कर दो जन को । ।१।।

हिंसा से निशिदिन दूर रहें
हम प्रीत ही प्रीत बढ़ाएँ ।
अच्छाई की ओर मोड़ दें
हम दुर्जन के मन को ।। २ ।।

छल कपट तजें और नेक
बनें नित आगे बढ़ते जाएँ ।
पीछे कभी न कदम हटाएँ
हमको यह वर दो ।। ३ ।।