कैसे होवेगा कल्याण

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कैसे होवेगा कल्याण

कैसे होवेगा कल्याण

कैसे होवेगा कल्याण,
आज नर-नार हैं दुखी।।

टेक।

किसी समय सब देश निवासी प्रतिदिन हवन रचाते।
सामग्री हर ऋतु की अपने हाथों स्वयं बनाते।।
कितना ऊँचा था विज्ञान।।1।। आज…..

हर बीमारी को यज्ञों से दूर किया करते थे।
वायु मण्डल शुद्ध बनाके अधिक जिया करते थे।।
पौष्टिक थे सारे सामान।।2।। आज…..

आज सुबह से रोज शाम तक होते उल्टे काम।
नर-नारी मिल धूम्रपान का करते प्राणायाम।।
जाने माने ना इन्सान।।3।। आज……

बिना यज्ञ के वायु मण्डल है अब दूषित भारी।
तरह-तरह की बढ़ीं देश में अनगिनती बीमारी।।
जिनका होता नहीं निदान।।4।। आज……

वायु शुद्ध करने का जग में केवल एक तरीका।
बड़े-बड़े यज्ञों को करिये, कर्म श्रेष्ठतम नीका।।
सुखमय होगा सकल जहान।।5।। आज…..

अगर भलाई चाहो तो सब वैदिक पथ अपनाओ।
ऋषियों की मर्यादा सीखो, सबको सदा सिखाओ।।
करते कवि ‘नरदेव’ बयान।।6।। आज…