कर ओ३म् नाम से प्यार
कर ओ३म् नाम से प्यार,
जगत में कोई नहीं अपना।।टेक।
जब तक आती-जाती श्वासा,
तब तक दुनिया बीच तमाशा।
जिस दिन टूटे इसका तार,
डालकर ले जाते कफना।।
1।।
जिसको समझे था तू मेरा,
उसने फूंक दिया तन तेरा।
ऐसा जग का व्यवहार,
समझ ज्यों नींद बीच सपना।।
2।।
मत कर इस जीवन में भूल,
ये मानव तन बहुत अमूल्य।
इसको मत करना बेकार,
लगाकर आलस में झपना।।
3।।
गर तू फेर मनुष्य तन चाहे,
क्यूँ ना प्रभु से प्रीत लगाये।
‘राघव’ हो जाये बेड़ा पार,
प्रेम से ओ३म् नाम जपना।।
4।।
























