वक्त की कदर करो वीरवरो।

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वक्त की कदर करो वीरवरो।

वक्त की कदर करो

(तर्ज-कव्वाली)

वक्त की कदर करो वीरवरो।
वक्त की कदर करो।
झोलियाँ सुख से भरो वीरवरो।
वक्त की कदर करो।

१. वक्त जो बीत जाये। फिर न वो हाथ आये ।
वक्त जिसने भी खोया। हाथ मलमल के रोया।
वक्त जिसने संभाला। मिली ख़ुशियों की माला।
वक्त को सर झुकाओ। और वरदान पाओ।
वक्त पर वक्त के सागर को तरो वीरवरो।
वक्त की कदर करो…..

२. वक्त ऊँचा उठाये। वक्त नीचे गिराये।
वक्त गर मेहरबां हो। यह ज़मीं आसमां हो।
वक्त जिसको दबाये। ख़ाक में ही मिलाये।
वक्त की तेज़ छुरी। बमों तोपों से बुरी।
वक्त की मार से हर वक्त डरो वीरवरो।
वक्त की कदर करो…..

३. वक्त रुकता नहीं है। वक्त झुकता नहीं है।
वक्त ही बादशाह है। वक्त ही देवता है।
वक्त सब से बड़ा है। सब के सर पर खड़ा है।
वक्त की बात क्या है। कोई दिन रात क्या है।
वक्त को ताक पे हरगिज़ न धरो वीरवरो।
वक्त की कदर करो…..

४. वक्त पर काम करो। तभी आराम करो।
वक्त बरबाद न हो। बुरी बुनियाद न हो।
वक्त के पास आओ। या उसे पास लाओ।
वक्त अपना बनाओ। वक्त के गीत गाओ।
वक्त पर कष्ट ‘पथिक’ सबके हरो वीरवरो।
वक्त की कदर करो……