क्या करना हमको
क्या करना हमको, कर बैठे क्या आज।।
टेक।
वेद प्रचारक ऋषि दयानन्द ने आवाज लगाई थी।
आर्य जाति जो सोई थी वह फिर से आय जगाई थी।
जिसे देखकर पोप मंडली सबकी सब दहलाई थी।।
पाखंड खंडनी ध्वजा कुंभ के मेले में फहराई थी।
बतलाई थी वेद सभ्यता बदला सभी समाज।।1।। क्या…
दयानन्द के अनुयायी श्री लेखराम झन्डा ठाया।
श्रद्धानन्द ने तो शुद्धि का काम पूर्ण कर दिखलाया।।
कितने आर्य वीरों ने खुद को फाँसी पर लटकाया।
देख देख तप त्याग हमारा, अंग्रेजी दल घबराया।।
धाया वह अंग्रेज यहाँ से, देकर हमें स्वराज।।2।। क्या…
चला गया अंग्रेज किन्तु कुछ बीज रह गया बाकी है।
खान-पान पहरान दे गया सिखा गया चालाकी है।।
बदल गया इतिहास देश का करके अति नालाकी है।
पागल बना गया लोगों को चलाई उल्टी चाकी है।।
आंकी है ना चाल कोम अब बिगड़ी बे-अन्दाज।।3।। क्या…
आजादी को पाकर के अब हम ऐसे आजाद हुए।
धर्म-कर्म ईश्वर को भूले, बिल्कुल बे-मर्याद हुए।।
नये-नये मत पंथ बने हैं झगड़े और विवाद हुए।
एक-दूसरे से कर घृणा इस कारण बरबाद हुए।।
दंग हुए नरदेव देखकर यह बेढंगा साज।।4।। क्या…
क्या करना हमको, कर बैठे क्या आज।।
























