दाता तेरी भक्ति का सुख है निराला
दाता तेरी भक्ति का सुख है निराला,
अमृत पीवे कोई कर्मों वाला। टेक।
दाता तेरे दर का जो है भिखारी,
आशा तृष्णा मिटे मन की सारी।
प्रभु भक्ति में मन होवे मतवाला ।।१।।
अमृत पीवे कोई…..
प्रेम का दीपक प्रेम की बाती,
जगमग जोत जले दिन राती,
मन मन्दिर में करो उजियारा ।।२।।
अमृत पीवे कोई……
दासन दास को देना सहारा,
भवसागर से पार उतारा,
करो कृपा ओ दीन दयाला ।।३।।
अमृत पीवे कोई……










