हे देव आपके स्वागत को मैं सुमन माल ले आज खड़ी।

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हे देव आपके स्वागत को मैं सुमन माल ले आज खड़ी।

हे देव आपके स्वागत को,
मैं सुमन माल ले आज खड़ी।
अखिलेश्वर की अनुकम्पा से,
आई है सुन्दर सुखद घड़ी।।

दिनकर के निहारते ही ज्यों,
खिल जाती कमलों की अवली।
दर्शन कर आज आपके त्यों,
खिल उठी है मेरी हृदय कली।।

आशा के जल से सींच हरी,
की मैंने जो जीवन डाली।
वह आज आपके चरणों में,
मैंने है अर्पित कर डाली ।।

है यही विनय मैं हूँ अबोध,
त्रुटियों पर देना ध्यान नहीं।
कर सकी आपके स्वागत का,
किच्चित् समुचित सामान नहीं।।

इस लुमन माल में गुम्फित,
अनुराग भरा मेरा मन है।
स्वीकार करो स्वीकार करो,
आदर के साथ समर्पण है।।