तुम सुनियों भारत नारी जी

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तुम सुनियों भारत नारी जी

तुम सुनियों भारत नारी जी
क्या हो गई दशा तुम्हारी।
विद्या का पढ़ना छोड़ा
पतिव्रत धर्म को तोड़ा-
गई अकल तुम्हारी मारी जी। क्या०

ईश्वर को तुमने भुलाया,
पत्थरों को रोज निहलाया।
हुई मूर्खा नारी सारी जी।
क्या० निज पति को गाली दीनी,
सण्डों की सेवा कीनी।

जो उतरे नहीं उतारी जी।।
क्या० नहीं किया पति का
आदर कब्रों पर चढ़ाई चादर।
तुम समझो नहीं गंवारी जी।
क्या० कहें ‘वासुदेव’ सुनो
बहिना निजपती का मानो कहना।
बनि जाओ आज्ञाकारी जी। क्या०