नाथन रथ नहिं तन पद-त्राना
नाथन रथ नहिं तन पद-त्राना,
केहि विधि जितव वीर बलवाना।
सुनहु सखा कहि कृपा निधाना,
जेहि जय होइ सो स्यंदन आना ।।
सौरज धीरज तेहि रथ चाका,
सत्यशील दृढ़ ध्वजा पताका।
बल विवेक दम परहित घोरे,
क्षमा कृपा समता रजु जोरे ।।
ईस भजनु सारथी सुजाना,
विरति चर्म सन्तोष कृपाना।
दान परसु बुद्धि शक्ति प्रचण्डा,
वर विज्ञान कठिन को दण्डा ।।
अमल-अचल-मन त्रोन समाना
संयम-नियम सिलीमुख नाना।
कवच अभेद विप्र गुरू पूजा,
एहि सम विजय उपाय न दूजा ।।
सखा धर्ममय अस रथ जाके,
जीत न सकहि कतिहुँ रिपु ताके।
दोहा- महा अजय संसार
रिपु जीत सकइ सो वीर।
जाके अस रथ होइ दृढ़
सुनहू सखा मति धीर ।।










