कहे कन्या हथजोड़ गन्दे रिवाजों को छोड़।

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कहे कन्या हथजोड़ गन्दे रिवाजों को छोड़।

कहे कन्या हथजोड़
गन्दे रिवाजों को छोड़।
हमें विद्या का गहना
पहनाओ पिता जी ।।

१ हाथ गले पावों में
बेड़ियां क्यों डाल दी।
डाकुओं को लूटने जंगल
में निकाल दी।

रहे रात दिन डर, कोई मार दे
अगर -ऐसे गुण्डो से
हमको बचाओ पिता जी….

२. कोई तो बता दो इन
जेवरों का फायदा।
छम-छम करती जायेगी
कहाँ शर्म और कायदा।
इनसे बिगड़ते है भाव,
केवले थोड़े दिन का चाव
क्यों पसीने का पैसा
गवांओ पिता जी..

अपने हाथ पांव से घर
का सारा काम किया।

गले में जनेऊ डाल सन्ध्या
सुबह शाम किया।
काढू लम्बे-लम्बे तार,
खद्दर पहने परिवार मेरा
सुन्दर सा चरखा मंगवाओ
पिता जी……

४. ऋषि दयानन्द जी ने
देवियों का मान किया।
अमृत पिलाया हमको
खुद विषपान किया।
भारत हो गया आजाद हम
सब बहने करती याद -म्हारे
गाने और सुनने को
आओ पिता जी………