ऋषि जोधपुर ना जाते
ऋषि जोधपुर ना जाते
तो कुछ और बात होती।
पापी ना जहर पिलाते
तो कुछ और बात होती ।।
१. वो सूर्य जहाँ में
हमको प्रकाश देता।
भानु को ना छुपाते –
तो कुछ और बात होती…
२. वेदों का भी अधूरा
जो भाष्य रह गया।
ऋषि चार चाँद लाते
तो कुछ और बात होती…..
३. वो जहर का जो
प्याला हाथों से छूट जाता।
जा हाथ थरथराते तो
कुछ और बात होती….
४ फिर चमकता सितारा
विज्ञान में हमारा।
वो गलतियाँ ना खाते
तो कुछ और बात होती…..
५. जापान जर्मनी क्या
अमेरिका भी हमारे।
कदमों में सर झुकाते
तो कुछ और बात होती…
६. रामरख’ भी गा रहा है
ऋषिवर के गीत प्यारे।
तुम भी मिलकर गाते
तो कुछ और बात होती…










