जग में वेद प्रचार हमें तो करना है।
जग में वेद प्रचार हमें तो करना है।
घर-घर में हम हवन करेंगे,
जपकर निश दिन ओ३म् भजेंगे।
शुद्ध वायु विस्तार हमें तो….।।१।।
वेद पढ़े हम वेद पढ़ावें,
संध्या गायत्री सिखलायें।
जीवन लोक, सुधार हमें तो…. ।।२।।
गिरे हुवे जो भाई हमारे,
सचमुच हैं आंखों के तारे।
इनका अब उद्धार हमें तो….।।३।।
पतित अछूत कहे जो जावें,
भाई हमारे कह अपनावें।
सब में प्रेम प्रसार हमें तो…।।४।।
बन्धु विधर्मी जो बन जावे,
धर्मदान दे उसे मिलावें।
शुद्धि की भरमार हमें तो…।।५।।
कभी किसी से नहीं डरेंगे,
धर्म पथ पर सभी मरेंगे।
निर्भय यह उच्चार हमें तो….।। ६ ।।
मरने से भई यों क्या डरना,
जन्म लोक में फिर-फिर धरना।
काम यही हर बार हमें तो….।।७।।
नहीं कभी अन्याय सहें हम,
जमें सत्य पे शान्त रहें हम।
प्रभु से यही पुकार हमें तो…।। ८ ।।










