अपने हाथों फोड़ रहे हो

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अपने हाथों फोड़ रहे हो

अपने हाथों फोड़ रहे हो
खुद अपनी तकदीर तप
और भक्ति के बिना यह
दुर्बल हुआ शरीर।। टेक ।।

मैं आपको जगाना चाहता जाग जाओ
जवानों भूल गये
अपने आपका स्वरूप पहचानों
ऋषि-मुनियों की बात को
जानों जो होते परम फकीर ।।१।। ।

सफल असफल जीवन का एक मूल मन्त्र
अच्छाई-बुराई का ही समझ लो
अन्तर जन्त-मन्त्र जादू टोने की ना.
पीटा करो लकीर।।२।।

उच्च विचार था जीवन सादा भूल गये
राम वाली मान मर्यादा पाप फैल गये
हद से ज्यादा, न करें धर्म में शीर ।।३।।

भीष्म से यहाँ हुए ब्रह्मचारी
भीम बलि के बल की महिमा थी
न्यारी कृष्ण जी की नीति प्यारी
ना रहे अर्जुन के तीर ।।४।।

तप में किसी को रह न जाय
शंका स्वयं करके देखो तप है
नाम परिश्रम का तप के पथ का
बहादुर बंका बन जा ‘सत्यवीर’ ।।५।।