तव वन्दन हे नाथ करें हम
तव वन्दन हे नाथ करें हम,
तब पूजन हे ईश करें
हम तव चरणन की छाया पाकर,
शीतल सुख उपभोग करें हम।।
भारत जननी की सेवा का,
व्रत भारी व्रत नाथ करें
हम माता का दुःख हरने के हित,
न्यौछावर निज प्राण करें हम।।
पाप शैल को तोड़ गिरावें
वेदाज्ञा इक शीश धरें
हम राग, द्वेष को दूर भगाकर,
गायत्री का जाप करें हम।।
फूले ऋषिवर की फुलवाड़ी
विद्यामद्यु का पान करें हम।
सायं प्रातः तुझ को ध्यावें
भव सागर से पार तरें हम।।










