व्रतपते बल के भण्डारा
व्रतपते बल के भण्डारा,
प्रातः काल, मैं पुत्र तुम्हारा।
तव चरणन में चित्त देता हूँ,
सुन्दर समय पर व्रत लेता हूँ।
दिन भर मैं ना पाप करूँगा,
प्रातः सायं जाप करुगां।
सब अंगों को वश में करके,
शुभ मार्ग में सदा विचरके।
कर्म मैं वेद अनुसार करुगों,
शुभ कर्मों से प्यार करूँगा।
धर्मपूर्वक करूँगा गुजारा,
केवल तेरा रहे सहारा।
पर उपकार में रहे जीवन,
धन बल तेरे कर दूँ अर्पण।
जब ही मन में पाप समावे,
जब ही बुद्धि कुमार्ग जावे।
तब ही दया अपार दिखाओ,
पाप कर्म से प्रभु बचाओ।
प्रातः काल तुझे नित ध्यावें,
आलस्य निद्रा दूर भगावें।










