भारत के नर-नारी जय बोलो दयानन्द की।
भारत के नर-नारी जय
बोलो दयानन्द की।
‘ईश्वरसिंह’ क्या बतलाएँ
ऋषि जी की महानता।
कौन ऐसा देश है जो ऋषि को
नहीं जानता वेदों के प्रचारी….।
मन्दिर अन्दर मूलशंकर
शंकर को पहचानते।
मूर्ति को देख सच्चे
चेतन को जानते-
ये पोप की हुशियारी….।
हीराबल्लभ हर को
भजन लागे हारकर।
मूर्ति बेचारी झट गंगा की
धार कर पत्थर के पुजारी….।
विषदेवा कैद किया
तहसीलदार पुकारते।
कैद से छुड़ाने आया
ऋषि जी ललकारते हथकड़ी झाड़ी….।
मस्त सांड परे हटा
देख ब्रह्मचारी को।
कीचड़ से खींचकर निकाल
रहे गाड़ी को-गौ हितकारी….।
विक्रमसिंह बल देखे
बग्गी पकड़ाय के।
देख के हो मग्न सिर श्रद्धा
से झुकाय के बाल ब्रह्मचारी….।
मथुरा के ठग रण्डी भेजते
ऋषि जी के पास में।
कुकर्म छोड़ माफी मांगी
रण्डी करे अरदास मैं डूबती उभारी….।










