हमको तो दुनिया जाने हम वीर दयानन्द के।
हमको तो दुनिया जाने
हम वीर दयानन्द के।
हम वीर दयानन्द के
हम शेर श्रद्धानन्द के ॥
खूब डटेंगे नहीं हटेंगे
एक इंच अपने पग से।
खून की दरिया बह जाए
चाहे शरीर की रग-रग से।
हम दयानन्द के मतवाले
हम वीर दयानन्द के….।
एक नहीं दो चार नहीं
लाखों हैं वीर खजाने में।
भीड़ लगी मिटने वालों की
आगे बढ़-बढ़ आने में ॥
भर देंगे जेलखाने हम
वीर दयानन्द के….।
आठ पहर घण्टे क्या
मुश्किल हम को पत्थर तोड़ना।
ये तो जयमालाएँ हैं चुन-चुनकर
इनको जोड़ना। ले लेंगे हम
आजादी हम वीर दयानन्द के…..।










