हो समय ने फिर ललकारा है।
हो समय ने फिर ललकारा है।
देश धर्म द्रोहियों से लड़ना
हमारा नारा है।
- हम भारत के वासी
हमारा राज प्रजातन्त्र है।
वेदों के उपासक हमारी
संस्कृति पवित्र है।
खुद जीएं और जीने दें
ऐसा हमारा चरित्र है।
कभी इन्सानियत से
हमने रिश्ता तोड़ा नहीं।
सच्चाई के रास्ते से हमने
मुख मोड़ा नहीं।
जिसने हमको छेड़ा पहले
उसको हमने छोड़ा नहीं।
हो जानता यह जग सारा है….।
बड़े-बड़े खूंखारों का
हमने मुंह मारा है।
देश को जरूरत है
मजबूत कर्णधारों की।
देश को जरूरत है
पटेल से सरदारों की।
देश को जरूरत नहीं
इन फिल्मी सितारों की।
कुर्सी के पुजारी अपनी
कुर्सी को बचाते रहेंगे।
ये कर दिया वो कर दिया
शोर यूं मचाते रहेंगे।
उधर बेगुनाहों का खून
वो बहाते रहेंगे।
हो बड़ा ये खतरा भारा है….।
कहे ‘खेमसिंह’ कहीं
देश का ना हो जाय बंटवारा है।
देश की अखण्डता को
खण्डित नहीं होने देंगे।
आपस में हम फूट के
बीज नहीं बोने देंगे।
आजादी रूपी दौलत को
हरगिज नहीं खोने देंगे।
जो करते हैं बकवास
आज गैरों के इशारों पर।
लानत है ऐसे देशद्रोही
गद्दारों पर।
करें ना विश्वास कभी
भूलकर मक्कारों पर।
हो हुआ दिल दुःखी हमारा है…..
ईंट का जवाब देंगे पत्थर
से और न चारा है।
गर पहले हमारे नेता
ऐसी गलती खाते ना।
तो आज के ये दिन कभी
देखने में आते ना। मुट्ठी
भर ये लोग कभी शोर
यों मचाते ना।
हमने इनकी नियत को
अच्छी तरह पहचाना है।
लाहौर का फैसला तो
झूठा-सा बहाना है।
सिर्फ इनका एक काश्मीर
का निशाना है।
हो खास गैरों का इशारा है….।
हो खुल्लमखुल्ला
पाकिस्तान ये नाच नचारा है।










