यह गगन हमारा है

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यह गगन हमारा है

यह गगन हमारा है
यह धरती अपनी है।
इसकी हर सन्ध्या भोर
सुहानी अपनी है।

सूरज की किरणें देख रही
धरती के बेटे बदल रहे।
नदियों की धड़कन तेज हुई
सागर के सीने उबल रहे।
आजाद इरादों को अहा-
बन्धन स्वीकार नहीं अहा….।
दुश्मन की गरदन पर तलवार
उतरनी है-यह गगन हमारा है….।

जीओ और जीने दो स्वयं भी
भारत भू की वाणी है।
लेकिन हमको अन्यायी सत्ता की
धूल उड़ानी है।
हमको तो जीवन की अहा-
दुर्बलता स्वीकार नहीं अहा….।
अपने पुरखों की तरह फिर
अमरता वरनी है-यह गगन हमारा है….।

आओ अटल प्रतिज्ञा लें
दुश्मन का दर्प मिटाने को।
आजादी पर ही जीने को
आजादी पर मिट जाने को।
विप्लव की आंधी रुके अहा-
हमको स्वीकार नहीं अहा….।

हमको तो रावण की फिर
लंका जलानी है-
यह गगन हमारा है….।