जरा दुश्मन से कह दो रे

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जरा दुश्मन से कह दो रे

जरा दुश्मन से कह दो रे
कि हम हैं देश दिवाने-2

हमारी देश-भक्ति ही,
अनोखा रंग लायेगी।
टोली ये आर्यवीरों को,
बनाकर गीत गायेगी।
भरेंगे जोश हर दिल में
मेरे ये जोशीले गाने जरा दुश्मन….।

चलेंगे जिस जर्मी पर हम,
वहाँ तूफान आएगा
जो टकर लेगा हम से,
वो कब्रिस्तान जायेगा।
हम उनकी जान ले लेंगे
वतन के होके रखवाले जरा दुश्मन….।

उठो हर फूल से कह दो
कि वो बन जाए अंगारा।
चमन वालों की गैरत को,
सही यादों ने ललकारा।
सदा से जलते आए हैं,
शमां पर ऐसे परवाने जरा दुश्मन….।

चलेंगी युद्ध में सजकर,
अरे वो ऐसी टोलियाँ।
मिटा दें आज दुश्मन को,
चलेंगी ऐसी गोलियाँ।
हम अपनी जान दे देंगे,
वतन पर होकर मस्ताने जरा दुश्मन…।