हम सैनिक ऋषि दयानन्द के दुनिया में धूम मचा देंगे।
हम सैनिक ऋषि दयानन्द के
दुनिया में धूम मचा देंगे।
गर पर्वत आए रस्ते में ठोकर से
इसे गिरा देंगे।
उस परमपिता ने हमको भी,
यह वीर निशानी सौंपी है।
हम डंका वैदिक धर्म का सारी
दुनियां में बजा देंगे।
सब आफत और मुसीबत को
हंस-हंसकर सिर पर झेलेंगे।
हम लाज धर्म की रखेंगे तो
अपना आप मिटा देंगे।
हम पुत्र हैं भारत माता के,
माता पर संकट आए जब।
हम इसके संकट काटेंगे और
अपना खून बहा देंगे।
हम भारतीयों के सेवक हैं,
ये सब अपनी माँ के जाए हैं।
जहाँ उनका पसीना टपकेगा,
हम अपना खून बहा देंगे।
कह दो गुण्डों-मुस्टण्डों से,
हरकत से अपनी बाज आएं।
मैदां में अगर हम डट जाएं तो
नाकों चने चबा देंगे।
हम कृष्ण युधिष्ठिर अर्जुन की,
सन्तान हैं ऐ सुनले दुश्मन ।
हमारे सफल मनोरथ तब होंगे
जब धर्म पे जान गवां देंगे।










