ओ३म् नाम भजले

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ओ३म् नाम भजले

ओ३म् नाम भजले,
सुबह-शाम जपले,
मन मेरे अरे मन मेरे-2

जो चाहता है सुख पाना,
उस ईश्वर को ना भुलाना।
‘मधुर’ प्रीति लगा, गीत उसके ही गा-
मन मेरे अरे मन मरे…..

निज नाम है ओ३म् ईश्वर का,
वही रक्षक है जगती भर का।
श्रद्धा विश्वास कर,
उसकी ही आस कर
मन मेरे अरे मन मरे…..

वही सबका है पालनहारा,
जग में उसका ही है उजियारा
पितु मात है वही, सखा आत है वही-
मन मेरे अरे मन मरे…..

बिन हाथों जगत् है रचाया,
कण-कण में है आप समाया।
गाते ज्ञानी गुणी, संत योगी
मुनि-मन अरे मन मेरे…..